योगिराज में गौ माता की दशा सुधरी है या दुर्दशा हुई है इस पर सही राय किसानों से पूछी जाए तो असलियत सामने आएगी।
गौ माता में 33 कोटि देवी देवताओं का वास होता है , माना जाता है 84 लाख योनियों के बाद आत्मा गौ माता के रूप में वास करती है , यह आत्मा की विश्राम अवस्था होती है इस लिए गौमाता को पूजा जाता है।
भगवान श्री कृष्ण गौ माता की सेवा करते थे और पूजते थे उनके अधिकतर चित्रके गौमाता साथ ही नज़र आती हैं जिससे हिन्दू धर्मके गौ माता को उच्च स्थान प्राप्त है,
गाय का दूध और गौ घृत तो औषधीय है ही है , गौ मूत्र अनिल बीमारियोंके लाभकार बताया जाता है, गे का गोबर भी जैविक खाद बनाने के काम आता है।
यह भी कहा जाता है गाय ही ऐसा जीव है जो ऑक्सीजन ग्रहण करता है ऑक्सीजन ही छोड़ता है।
गौ सेवा सभी पुण्य से बढ़कर है सृष्टि की सुरक्षा गौ सेवा करने से ही सम्भव है।
योगिराज में गौ कशी पर रोक लगाने का अच्छा प्रायास किया गया परंतु यह आधा अधूरा प्रायास किसानों के लिए सर दर्द बन गया।
किसानों को योगिराज में कड़कती ठंड में बहुत ही ज्यादा कष्टदायक रहा जब किसानों को अपनी फसलों की सुरक्षा ले सारी सर्द रातो में अपने खेती की रखवाली में बितानी पड़ीं।इधर गौ मक़तक़्क़ कक भी लागातार तिरस्कार होता रहा है हज़ारो की संख्या में गौवंश भूख और प्यास से दम तोड़ता रहा ,
कुछ क्रूर किसानों ने गौ माता में भाला एवम अन्य धारदार हथियारों से प्रहार किया। अनेक घाव दिए अनेक जगहों में जानलेवा हमले हुए,
सरकार के प्रायास पूर्वनोयोजित योजनाबद्ध तरीके से क्रियान्वित नहीं हुए । बिना होमवर्क किये बस एक आदेश पारित कर थोपने का कार्य किया गया है।
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