🌹🌹🌹🌹गीत🌹🌹🌹🌹
याद करता है तुझको ये मेरा जिया
अब निगाहों पर मेरे है पहरा पिया
ज़िन्दगी के सफर में जब नजरें मिली
तब से जगती रही मैं पिया रातभर
तेरी यादों में ऐसे मैं खोई रही
ढल गयी रात तेरी ही जज़्बात पर
हमने कितना मनाया उसे तो पिया
याद करता है......
भानु की रश्मियाँ जब मुझपर पड़ी
सज गयी आज तन पे ज्यूँ शबनम लड़ी
श्यामा सी मैं तो इक दम खिलने लगी
क्यूँ सताये पिया मुझको तू हर घड़ी
कहीं लगता नहीं है हमारा जिया
अब तो अपना बना ले मुझे तू पिया
याद करता है..........
सच में कहती है मेरे गजरे की लड़ी
कहीं बीत न जाये मिलन की घड़ी
अब तो वश में नहीं है हमारा जिया
बंसरी को बजाता तू आजा पिया
याद करता है............
जब भी रूठूँ मैं तुझसे कभी भी सनम
मेरी बहियाँ पकड़ के मनाना सनम
मैं तेरे नयनों में बस खो जाऊँगी
प्यार में तब सराबोर कर जाऊँगी
आके गरवा लगा ले हमारे पिया
याद करता है.......
दीपिका महेश्वरी 'सुमन'
🌹🌹🌹🌹गीत🌹🌹🌹🌹
ज़रा थम के बरस ए काली घटा
कहीं दिल न दीवाना हो जाए
मुझ पर चढ़ता बूंदों का नशा
कहीं दिल न दीवाना हो जाए
शोख नजारे यूँ इतरा के कहें
जवां मौसम में खिलता है चमन
वादियां मुस्कुरा के पूछ रहीं
कब आओगे तुम ऐ मेरे सनम
मुझको बहकाये मदहोश समां
कहीं दिल न दीवाना हो जाए
ज़रा थम के बरस ए...
आंचल मेरा जब लहराके चले
झूमें मस्ती में डाली सा बदन
आकर छू लेती ठंडी हवा
बन जाता है महका चंदन
तन मन मेरा यूँ चहक रहा
कहीं दिल ना दीवाना हो जाए
ज़रा थम बरस ए...
मैं तो जीती हूं बस देख तुझे
तू ही तो मेरे जीने की लगन
छम छम करके जब तू बरसती है
मिट जाती मेरे सीने की तपन
बदरा तू जरा हौले से बरस
कहीं दिल ना दीवाना हो जाए
याद करता है तुझको ये मेरा जिया
अब निगाहों पर मेरे है पहरा पिया
ज़िन्दगी के सफर में जब नजरें मिली
तब से जगती रही मैं पिया रातभर
तेरी यादों में ऐसे मैं खोई रही
ढल गयी रात तेरी ही जज़्बात पर
हमने कितना मनाया उसे तो पिया
याद करता है......
भानु की रश्मियाँ जब मुझपर पड़ी
सज गयी आज तन पे ज्यूँ शबनम लड़ी
श्यामा सी मैं तो इक दम खिलने लगी
क्यूँ सताये पिया मुझको तू हर घड़ी
कहीं लगता नहीं है हमारा जिया
अब तो अपना बना ले मुझे तू पिया
याद करता है..........
सच में कहती है मेरे गजरे की लड़ी
कहीं बीत न जाये मिलन की घड़ी
अब तो वश में नहीं है हमारा जिया
बंसरी को बजाता तू आजा पिया
याद करता है............
जब भी रूठूँ मैं तुझसे कभी भी सनम
मेरी बहियाँ पकड़ के मनाना सनम
मैं तेरे नयनों में बस खो जाऊँगी
प्यार में तब सराबोर कर जाऊँगी
आके गरवा लगा ले हमारे पिया
याद करता है.......
दीपिका महेश्वरी 'सुमन'
🌹🌹🌹🌹गीत🌹🌹🌹🌹
ज़रा थम के बरस ए काली घटा
कहीं दिल न दीवाना हो जाए
मुझ पर चढ़ता बूंदों का नशा
कहीं दिल न दीवाना हो जाए
शोख नजारे यूँ इतरा के कहें
जवां मौसम में खिलता है चमन
वादियां मुस्कुरा के पूछ रहीं
कब आओगे तुम ऐ मेरे सनम
मुझको बहकाये मदहोश समां
कहीं दिल न दीवाना हो जाए
ज़रा थम के बरस ए...
आंचल मेरा जब लहराके चले
झूमें मस्ती में डाली सा बदन
आकर छू लेती ठंडी हवा
बन जाता है महका चंदन
तन मन मेरा यूँ चहक रहा
कहीं दिल ना दीवाना हो जाए
ज़रा थम बरस ए...
मैं तो जीती हूं बस देख तुझे
तू ही तो मेरे जीने की लगन
छम छम करके जब तू बरसती है
मिट जाती मेरे सीने की तपन
बदरा तू जरा हौले से बरस
कहीं दिल ना दीवाना हो जाए

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें