[ गीत🌹🌹🌹
ओ रे पिया, ओ रे पिया।
ओ रे पिया, ओ रे पिया॥
परछाई सी बनने लगी हूं।
तुझमें ही मैं घुलने लगी हूं॥
तूने ही तो मन मोह लिया।
ओ रे पिया, ओ रे पिया॥
फूलों सी मैं खिलने लगी हूं।
खुशबू बन महकने लगी हूं॥
तूने सजाया जीवन पिया।
ओ रे पिया, ओ रे पिया॥
हूँ ही नहीं मैं जो तू नहीं।
तेरे बिना मैं कुछ भी नहीं॥
तू ही तन मेरा तू ही जिया।
ओ रे पिया, ओ रे पिया॥
जाने कहां तू ओ पिया।
ढूंढे तुझे ये मन ओ पिया॥
बेचैनी में तड़पे जिया।
ओ रे पिया, ओ रे पिया॥
हूँ मैं ज़मी तू बादल पिया।
बूँदें बन के बरस जा पिया॥
मन की अगन में जलता जिया।
ओ रे पिया, ओ रे पिया।।
🌹🌹🌹गीत🌹🌹🌹🌹
याद करता है तुझको हमारा जिया
अब निगाहों पर मेरे है पहरा पिया
ज़िन्दगी के सफर में जब नजरें मिली
तब से जगती रही मैं पिया रातभर
तेरी यादों में ऐसे मैं खोई रही
ढल गयी रात तेरी ही जज़्बात पर
हमने कितना मनाया उसे तो पिया
याद करता है......
भानु की रश्मियाँ जब मुझपर पड़ी
सज गयी आज तन पे ज्यूँ शबनम लड़ी
श्यामा सी मैं तो इक दम खिलने लगी
क्यूँ सताये पिया मुझको तू हर घड़ी
कहीं लगता नहीं है हमारा जिया
अब तो अपना बना ले मुझे तू पिया
याद करता है..........
सच में कहती है मेरे गजरे की लड़ी
कहीं बीत न जाये मिलन की घड़ी
अब तो वश में नहीं है हमारा जिया
बंसरी को बजाता तू आजा पिया
याद करता है............
जब भी रूठूँ मैं तुझसे कभी भी सनम
मेरी बहियाँ पकड़ के मनाना सनम
मैं तेरे नयनों में बस खो जाऊँगी
प्यार में तब सराबोर कर जाऊँगी
आके गरवा लगा ले हमारे पिया
याद करता है.......
दीपिका महेश्वरी 'सुमन'
ओ रे पिया, ओ रे पिया।
ओ रे पिया, ओ रे पिया॥
परछाई सी बनने लगी हूं।
तुझमें ही मैं घुलने लगी हूं॥
तूने ही तो मन मोह लिया।
ओ रे पिया, ओ रे पिया॥
फूलों सी मैं खिलने लगी हूं।
खुशबू बन महकने लगी हूं॥
तूने सजाया जीवन पिया।
ओ रे पिया, ओ रे पिया॥
हूँ ही नहीं मैं जो तू नहीं।
तेरे बिना मैं कुछ भी नहीं॥
तू ही तन मेरा तू ही जिया।
ओ रे पिया, ओ रे पिया॥
जाने कहां तू ओ पिया।
ढूंढे तुझे ये मन ओ पिया॥
बेचैनी में तड़पे जिया।
ओ रे पिया, ओ रे पिया॥
हूँ मैं ज़मी तू बादल पिया।
बूँदें बन के बरस जा पिया॥
मन की अगन में जलता जिया।
ओ रे पिया, ओ रे पिया।।
🌹🌹🌹गीत🌹🌹🌹🌹
याद करता है तुझको हमारा जिया
अब निगाहों पर मेरे है पहरा पिया
ज़िन्दगी के सफर में जब नजरें मिली
तब से जगती रही मैं पिया रातभर
तेरी यादों में ऐसे मैं खोई रही
ढल गयी रात तेरी ही जज़्बात पर
हमने कितना मनाया उसे तो पिया
याद करता है......
भानु की रश्मियाँ जब मुझपर पड़ी
सज गयी आज तन पे ज्यूँ शबनम लड़ी
श्यामा सी मैं तो इक दम खिलने लगी
क्यूँ सताये पिया मुझको तू हर घड़ी
कहीं लगता नहीं है हमारा जिया
अब तो अपना बना ले मुझे तू पिया
याद करता है..........
सच में कहती है मेरे गजरे की लड़ी
कहीं बीत न जाये मिलन की घड़ी
अब तो वश में नहीं है हमारा जिया
बंसरी को बजाता तू आजा पिया
याद करता है............
जब भी रूठूँ मैं तुझसे कभी भी सनम
मेरी बहियाँ पकड़ के मनाना सनम
मैं तेरे नयनों में बस खो जाऊँगी
प्यार में तब सराबोर कर जाऊँगी
आके गरवा लगा ले हमारे पिया
याद करता है.......
दीपिका महेश्वरी 'सुमन'

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