यूं तो लोग जिंदगी भर सिर्फअपने और अपने परिवार के विषय मे ही सोचते हैं परंतु कुछ लोग समाज के लिए देश के लिए भी जीते हैं ।
यह बात अलग है समाज के लिए जीने के लिए संघर्ष करना होता है । यहां हम अपने अनुभव साझा कर रहे हैं जिससे आप सभी को उन अनुभवों से कुछ सीखने को मिले । ऐसी बहुत बातें है जो आपको कोई नहीं बताएगा हमे तो किसीने बताया नहीं हम तो देश सेवा समाज सेवा में लगे रहे और हमारे अपने हमारे ही घर मे हमारे जीवन भर की कमाई से ऐश करते हुए हमारे विरुद्ध षडयंत्र बनाते रहे, कमजोर करने के लिए अनेक तरीके अपनाए गए 12 वर्ष में योजना बद्ध तरीके से हमे परेशान और बदनाम किया गयाअवसर की प्रतीक्षा में रहे कि कब यह कमजोर हो और हम इसका लाभ उठाएं।
हमने यह महसूस किया कि लोग हमें खुश देखकर कदापि खुश नही थे बल्कि उनकी सोच थी कि जिंदगीभर हम उनके आदेश का पालन करे और उनकी दया पर जीवित रहें, हम रहे स्वाभिमानी और हमारे स्वाभिमान को उन सब ने नाम दिया अभिमान का। बड़ों को सदैव सम्मान दिया है और सम्मान योग्य व्यक्ति को सम्मान देना अच्छा भी लगता है यह अलग बात है हमे किसी की दया का पात्र नहीं बनना सम्मान देकर ना ही कोई मतलब सिद्ध करना है। चापलूसी और चाटुकारिता हमारे व्यक्तित्व में कही नही टिकती।
इन दो वर्षों में हर एक शख्स खुलकर सामने आता जा रहा है उनकी सोच उनके विचार सब। , इस लेख के माध्यम से सभी को बता देना चाहता हूं अपना उसे मानता हूं जिससे कुछ कहने की आवश्यकता ना पड़े और वो हमारी परेशानी समझ जो है जैसा है साथ खड़ा रहे, ना कि उसे की मन ही मन खुश हो बाते मीठी करे मन ही मन प्रसन्न हो कि हां अब सही है , अब आया ऊंट पहाड़ के नीचे।
आज दिनांक 02/11/2021 को सुबह थाना बलदेव जाना हुआ जहां हमारे गांव के होमगार्ड मिले नीरज चौधरी और हुक्म सिंह चौधरी , हुकुम सिंह काफी समय बाद मिले , मिलते ही बहुत प्रेम और सम्मान दिया गांव में रास्ते मे जलभराव की शिकायत करने लगे , हमारे मित्र ले पिता है हुकुम सिंह ,हमने अपने मित्र नाहर सिंह की कुशल क्षेम पूछी और गांव आकर स्थिति का मुआयना कर रास्ता सही कराने का आश्वासन दिया चाचा हुकुम सिंह जी ने हमारे द्वारा किये गए पिछले कार्यों की सराहना की । थाने से मालूम हुआ हल्का इंचार्ज प्रबलप्रताप सिंह झरोठा बॉर्डर पर हैं धनतेरस के दिन व्यस्त हैं बहुत वही मुलाकात होगी ।
फोन पर बात हुई उन्होंने कहा यही आ जाओ बैठकर बात करते हैं वहां पहुंच सभी पुलिसकर्मियों से वार्ता हुई सभी का व्यवहार मित्रतावत रहा सभी ने माना कि हमे अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है , वहां हमारे ही गांव के होमगार्ड राजेन्द्र सिंह जी थी हमेशा से सम्माननीय रहे हैं बोले घर की बात निपटा लो भैया जी पिता जी का दिमाग फिर गया है , प्रबल प्रताप जी ने एस ओ बलदेव नरेंद्र यादव जी को बताया मृदुल जिया आये है अपत्नी राइफल मांग रहे हैं और दीपावली घर पर मनाने की बोल रहे हैं , घर जाए और कहीं झगड़ा ना हो जाए वहां , एस ओ बलदेव उधर से बोले पिता पुत्र का मामला है बिठाकर बात कर लो निपटा लो , चौकी इंचार्ज प्रबल प्रताप सिंह ने पपीताजी को फ़ोन किया आप यहां आजाइये बात करते हैं कुछ बोले आधा घन्टा लगेगा पहुंचता हुँ , आधे घण्टे बाद हम पुनः पहुंचे परंतु पुनः फोन किया इस बार जबाब आया कि नही आडकते आज बिजी हैं शाम को देखेंगे ।
हमने इस बीच पुलिस के सभी साथियो से बातें की और कहा पुलिस किरायेदार को तो निकाल नहीं पाती हम घर के मालिकों को कैसे निकाल सकती है? ऐसी कोई रूलिंग हैं कही कि किसीको अपने ही घर जाने से रोका जाए।
वहां मौजूद राजेन्द्र सिंह जी होमगार्ड से हमने कहा लोगो को हमारे संबंध में आपने बताया नहीं है जब पुलिस द्वारा गांव के 200 लोग अज्ञात में लिख कर कार्यवाही की जा रही थी तो सिर्फ हम ही सारे मामले से पूरे गांव के लोगो को निकाल कर लाये किसी से एक पैसा नहीं लिया था ।
अपहरणकर्ता को जिन पुलिसकर्मियों ने छोड़ दिया था उन्हें ससपेंड कराया बदमाश को दुबारा पकड़वाया था डी आई जी होमगॉर्ड पर एक बार बड़ी कार्यवाही कराई भ्रष्टाचार पर लगाम लगाई ।
ऐसे अनेक कार्य कराये लोगो की मुसीबत में उनके साथ रहे कानून के रास्ते से न्याय दिलाया।
और अब पुलिस अफसर ये सोचने लगे इन्हें बेबकुफ़ बनाते रहेंगे मीठे बोलेंगे और फर्जी एफआईआर दर्ज कराएंगे और छोटी मोटी कार्यवाही कर इन्हें पाबंद कर देंगे । इससे डर कर ये घर नही जाएगे न्याय नहीं माँगेगे। कोई कार्यवाही नहीं करेंगे केस वापस ले लेंगे , ऐसा कुछ भी नहीं होने वाला है।
किसी भी परिस्थिति में न्याय लेकर रहेंगे। सभी को हमारा सहयोग करना होगा क्योंकि सच का सहयोग एक न एक दिन करना ही होता है।
वहां उपस्थित सभी ने बात को समझा और स्वीकारा और कहा आप अपनी जगह बिल्कुल सही है कुछ माता पिता भी अपने बच्चों के साथ द्वैषभाव करते हैं और बच्चों को विद्रोह करने पर मजबूर कर देते हैं।
जब सारी सीमाएं खत्म हो जातीं हैं तो मजबूरी में सभी कार्यवाहियां करनी होती हैं और न्याय मिलता अवश्य है भले ही देर से सही। ईश्वर भी न्याय करता है और कानून भी।
शाम को पुनः फोन करके पूछा गया कि पिताजी की कोई खबर आई जबाब आया नहीं कोई फोन नहीं ना ही उनकी उपस्थिति हुई। आप अपनी जगह सही है उनका बुद्धि विवेक समाप्त हो चुका है उन्हें भला बुरा सही गलत कुछ दिखाई नहीं दे रहा है ।
शुभरात्रि

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