बुधवार, 15 अप्रैल 2020

suneel krishna pandit

sunil krishan pandit, 16.4.2020

         मैंने हज़ारों व्यक्तियों पर शोध के बाद महसूस किया है कि शनि के प्रभाव वाले व्यक्ति 40 की उम्र के पश्चात ही कामयाब होते हैं। मसलन अमरीश पुरी, बोमन ईरानी, गोपाल कांडा, रामदेव जिन्हें 38-40 से पहले कोई जानता ही नही था, जो किसी से 100 रुपये उधार ले लेते थे वे उसको वापिस नही कर पाते थे, अधेड़ उम्र के बाद करोड़ों अरबो के मालिक बने और प्रसिद्ध हुए। हालांकि बुद्धि और शक्ति उनमे पहले भी उतनी ही थी।

         कई व्यक्ति पहले कामयाब हो जाते हैं जैसे सानिया मिर्ज़ा टाइप जो 17 साल की उम्र में आसमान छूती हैं फिर जीवन भर गुमनामी में घूमती हैं। सबके जीवन की अपनी यात्रा है। कोई जीवन के मध्य में दुख भोगता है, कोई शुरुआत में कोई अंत मे। किसी किसी का जीवन समतल मैदानों की तरह है तो किसी किसी का पर्वत पठारों की तरह उबड़ खाबड़। अक्सर स्कूल में अच्छे नंबर लाने वाले 3 प्रतिसत बच्चे ही जीवन मे कामयाब हो पाते हैं उनका बेहतरीन समय उसी समय गुजर चुका होता है। कोई कोई 50-55 की उम्र तक पांच सितारा होटल में खाता है और बाद में दो रोटी को तरसता है। किसी किसी के पास अचानक पैसा आता है लेकिन कुछ वर्षों में ही कोई यारा प्यारा टपक जाता है।

      हंसने वाले का रोने का समय जरूर आता है और रोने वाले का हंसने का। जीवन अपने कोटे का धन, सुख, दुख, इज़्ज़त और बेइज़्ज़ती जरूर देता है किसी को पहले और किसी को बाद में।

       प्रकृति का अपना चक्र है जो हमे मिल रहा है उसमें सिर्फ हमारा योगदान नही है उसमें हमारे दादा, पिताजी, माताजी, नाना नानी के संचित कर्म भी हैं। उनके द्वारा की गई या सोची गयी इच्छा डिजायर भी  छुपी हुई है। सब घूम के आता है, अच्छा या बुरा।
     अगर किसी का तलाक हो रहा है या किसी 3 साल की बच्ची के साथ रेप हो रहा है इसमें उनका क्या योगदान है ? ये उनकी पहली दूसरी या तीसरी पीढ़ी के संचित कर्म हैं जो अगली पीढ़ी को मिल रहे हैं।
     तुमने किसी लड़की को धोखा दे दिया या कोई बुरा कार्य छुप के कर दिया, हो सकता है किसी ने नही देखा पर प्रकृति से कोई छुपा नही सकता वो कर्म तुम्हारे जीवन मे या तुम्हारे बच्चों के जीवन मे घूम कर आएगा। खासकर तुम्हारी तीसरी पीढ़ी उस से ग्रसित जरूर होगी।

        कोई कोई व्यक्ति पोथी पत्री किताबें पढ़ कर भी गरीब है, किसी किसी अनपढ़ गंवार के पास भी अपार संपदा है, नौकर चाकर हैं। कोई बिना कार्य किये ही 56 भोग खाता है कोई पूरा दिन ईंटे ढो कर भी सौ रुपये के लिए तरसता है। कोई कोई चंद पैसों की तनख्वाह के लिए अपना पूरा बेशकीमती जीवन दूसरे को दे देता है। किसी के पास अपार धन होते हुए भी चैन नही है।  दिल्ली के अंदर एक बहुत बड़ी जनसंख्या ऐसी है जिसके पास मर्सडीज bmw घर के बाहर खड़ी है लेकिन बैंक की क़िस्त चुकाने के पैसे नही हैं।

बहुत गहरा फार्मूला छुपा है इस के पीछे।

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