यह बात वर्ष 2007 की है जब आर जे वाई एस प्रमुख मृदुल शर्मा द्वारा होमगार्ड डिपार्टमेंट की जांच कराई गई इसमें 12 होमगार्ड्स ने लिखित में शिकायत पत्र दिया और कहा महोदय हमें ढाई हज़ार रुपए मिलते हैं और जिसमें से ₹500 हमें ड्यूटी लगाए जाने के लिए रिश्वत देनी पड़ती है जो पैसे नहीं देता उसकी ड्यूटी नहीं लगाई जाती कैसे भी हमारे इस उत्पीड़न से हमें निजात दिलाएं, यह बात उत्तर प्रदेश के मथुरा जनपद की है इस शिकायत को मिलने के बाद पंडित मधु शर्मा ने कार्यवाही आगे बढ़ाई उस समय सरकार बसपा की थी बहन मायावती जी का शासन था जहां रामवीर उपाध्याय जी ऊर्जा मंत्री हुआ करते थे उनकी सहायता ली गई उन्होंने तत्काल एक पत्र डीआईजी के लिए लिखा डीजी होमगार्ड महावीर सिंह हुआ करते थे वे स्वयं इसकी जांच के लिए आए बलदेव थाने का मामला था इसमें आगे यह हुआ जांच में आने से पहले ही संबंधित दोषी अधिकारियों को इसका पूरा सूचना मिल गई और उन्होंने संबंधित शिकायतकर्ता होमगार्डों पर दवाब बनाना शुरू कर दिया असत्य के खिलाफ जब लड़ाई लड़ी जाती है तो सत्य के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ता है अब आप को बहुत बड़ा आश्चर्य होगा जान करके की इस संघर्ष के समय में जिन होमगार्ड्स के लिए जब आवाज उठाई गई तो उसका परिणाम कोई होमगार्ड बोलने वाला पैदा नहीं हुआ सभी शिकायतकर्ता अपनी बात से पलट गए और सभी संबंधित अधिकारियों के फेवर में बयान देने लगे मृदुल शर्मा ही अकेले थे वहां और उन सब का सामना करना उनके लिए बड़ा मुश्किल सा होता जा रहा था होमगार्ड्स बिल्कुल चुप खड़े हुए थे वह बोल नहीं पा रहे थे कुछ,डरे हुए सहमे हुए थे इसमें मृदुल शर्मा जी ने हिम्मत नहीं हारी और इस लड़ाई को जारी रखते हुए वहां शिकायतकर्ताओं से कहा हम तुम्हारे कारण यहां आए है अगर आज चुप रहोगे तो आगे आपकी कोई मदद नहीं कर पाएगा और सामने सारे विरोधी पार्टी भी खड़ी हुई थी जो कि अपने जन बल के साथ आई हुई थी जब मृदुल शर्मा को लगा कि वह अकेले हैं तो उन्होंने कुछ अपने साथियों को सूचना दी तब वहां आस पास के गाँव से लोग ट्रेक्टर ट्रॉली से आए इधर मीडिया कर्मियों को वहां पर बुलाया गया जो इलेक्टट्रॉनिक मीडिया के लोग वहां पहुंचे उनकी रिश्तेदारी जिन लोगों के खिलाफ कार्रवाई हुई थी उनसे निकल आई और मीडिया कर्मी कहने लगे कि यहां कुछ ऐसा करो जिससे हमारी हमें टीआरपी मिले कुछ लगे कुछ हो रहा है उन्होंने साफ मना कर दिया सहयोग करने से, कोई कवरेज नहींं की गई। जब एक युवा न्याय के लिए लड़ रहा था और आगे बढ़ कर लोगों की मदद करना चाहता था वह इस मार्ग में आने वाली समस्याओं से जूझ रहा था परंतु तभी उन होमगार्ड्स में से एक गोपाल सिंह नाम का होमगार्ड सामने आया और उसने वह आवाज उठाना शुरू कर दिया जिसे देखकर कुछ होमगार्ड्स में जोश आया उन्होंने जो शिकायत की थी उस शिकायत को आगे बढ़ाया डीआईजी होमगार्ड और उनके बाबू भ्रष्टाचार की चपेट में थे उन्होंने पैसे ले रखे थे उस शिकायत को दबाने के लिए वहां से जाने के बाद उस शिकायत को दबाने की कोशिश की गई जिसकी शिकायत पूर्व ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय जी से की गई मंत्री जी ने पूर्ण ईमानदारी के साथ परिचय देते हुए और डीआईजी पर कार्यवाही कराई वहां स्थित बाबू का तबादला कर दिया जैसा के शिकायत में लिखा गया था कि यह सब मिलीभगत से हो रहा है और गरीब होमगार्ड का शोषण किया जा रहा है यह पैसा ऊपर से नीचे तक जाता है इस बात को गंभीरता से लिया गया और राज्य स्तर पर कमेटी गठित की गई ड्यूटी लगाने के नाम पर जो धन उगाही हो रही थी उसे रोकने के लिए कंप्यूटराइज्ड ड्यूटी लगाने पर विचार किया गया और तब से लेकर आज तक कंप्यूटर से ऑटोमेटिकड्यूटी लगी चली आ रहीहै
यदि व्यक्ति चाहे तो क्या नहीं कर सकता अगर मृदुल शर्मा इस आवाज को नहीं उठाते तो होमगार्ड्स का शोषण इसी तरह होता रहता है बहुत कम लोगों को इस बात की जानकारी है मथुरा जनपद के होमगार्ड्स को इस बात की जानकारी है कि कोई मृदुल शर्मा नामक युवक आया और उसने लोगों के लिए लड़ाई लड़ी जिसमें कोई किसी प्रकार का खर्चा नहीं लिया गया खुद अपने पास से सारा खर्चा किया गया न्याय दिलाने के लिए जान जोखिम में डालकर लड़ाई लड़ी इस अभियान के कारण शर्मा भ्रष्टाचार के खिलाफ लडाई लड़ने में पूरे जनपद में प्रसिद्ध हो गए और अधिकतर लोगों ने सराहना की उसी समय एक बहुत बड़ा कदम उन्होंने और उठाया वर्तमान ग्राम प्रधान के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगे उस को उजागर करने के लिए सारे सबूत एकजुट करके गांव-गांव वीडियोग्राफी करवाई उसके खिलाफ बड़ी कार्रवाई की गांव में यदि किसी प्रधान के खिलाफ कोई बोलता था तो बहुत बड़ा जान जोखिम में डालने वाली बात हुआ करती थी कोई भी आदमी इस पर लड़ने इस तरह सामने पढ़ने के लिए तैयार नहीं होता था लेकिन अपनी जान की चिंता किए बगैर भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाला यह नवयुवक मृदुल शर्मा ही था जनता को जो अपना लाभ दिखाई देता है उसे सामने खड़ा हुआ कोई युवा भ्रष्टाचारी को ललकार रहा होता है तो स्वयं वहां पर कमजोर से कमजोर आदमी अपनी बात को रखने के लिए उपस्थित होता है और सामने खड़े होकर बिना डरे अपनी बात को कहता है भले ही सामने कितना भी दबंग आदमी क्यों ना हो और यह बात वहां पर साबित हो गई जो कार्य पिछले 2 साल में नहीं हुए थे वह 4 महीने के अंदर अंदर उस तत्कालीन प्रधान ने करवाए।

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