बुधवार, 22 अप्रैल 2020

रचनाएं- श्रीमती दीपिका माहेश्वरी बिजनोर उत्तर प्रदेश

ग़ज़ल🌹🌹🌹

वतनोचमन  मुश्किल में आ गया है।
कोरोनावायरस  कहर ढा गया है॥

गले मिलकर न पूछिए हाल कैसा है।
ये दौर  क्वॉरेंटाइन सिखा गया है॥

एक मीटर की दूरी अब जरूरी है।
न जाने ये कैसा मर्ज़ आ गया है॥

मिश्री सी बातें कानों में न कहिए।
सांसो में भी अब ज़हर आ गया है॥

नहीं कुछ खुदा से अब भी ऊपर है।
ये 'सुमन' खुदा ने खुद बता दिया है॥






ग़ज़ल 🌹🌹🌹



जिन्हें भाता नहीं था अपना शहर।
आज उनके लिए कठिन है हर पहर॥

खुदा ने पैदा किया तुम्हें जिस गली।
उसे नकारा है तुम्हीं ने हर पहर॥

खनकते सिक्कों से दामन भर लिया ।
नशा दौलत का तुम्हें चढ़ा हर पहर॥

क्यों भुला दिए तुमने मकसद सारे।
 जो बहते रहे तुम में बनकर लहर ॥

इसीलिए मिल रहा है तुमको 'सुमन' ।
 यहां सजा में हर पल खुदाई क़हर॥

श्रीमती दीपिका महेश्वरी 'सुमन' नजीबाबाद बिजनौर
 ग़ज़ल 🌹🌹🌹



पा के इश्क़ तेरा मग़रूर होने लगे।
दीवानगी में अब फना भी होने लगे॥

तेरे दिल की ज़मीं जो बंज़र हो गई।
मेरी मोहब्बत के पौधे भी मरने लगे॥

क्यों नहीं मैं भी थक कर यूँ शिकवा करूं।
क़हर से  तेरे बागबाँ भी जलने लगे॥

जो नहीं मानते थे तुझको सर्वोपरि।
वो भी झुककर तेरे आगे रोने लगे॥

ए खुदा हम पे थोड़ी सी रहमत करो।
अब आसमा से ज़हर भी बरसने लगे॥

तुम बन के रहनुमा कोई जादू करो।
बहारों के 'सुमन' फिर से खिलने लगे॥

श्रीमती दीपिका महेश्वरी 'सुमन' नजीबाबाद बिजनौर

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